रूबरू | Part 13 | Rubaru – A Hindi Story of Love and Relationships
आकिल की मौत के बाद आप एक बार भी उसके घर क्यों नहीं गए? उसकी हर सोच में उनके लिए नफरत थी। मेरा सवाल बहुत जल्द आपके सामने होगा। जवाब देने के लिए तैयार हो जाएं मिस्टर बॉस।
दरवाज़ा खुलने की आवाज़ पर उसका सोचों का सिलसिला टूट जाता है।
नज़र घुमा कर देखती है।
सामने ताबिश खड़ा था।
बिना नॉक के वह अंदर आ गया था।
लेकिन वह खामोश रही। क्योंकि यह घर उसका है यह बात हो चुकी थी पहले।
वह सवालया नज़रों से उसे देखती है। जैसे पूछ रही हो कोई काम।
मेरे लिए कॉफी बना दो।
उसकी नज़रों का सवाल समझ कर वह बोला।
मैं?
हां तुम...
मैं कोई कुक या शेफ नहीं जो आप के लिए कॉफी बनाऊं।
मैं दादी की केयरटेकर हूं। मैं सिर्फ उनके लिए ही काम करूंगी।
वह अपनी जगह से उठकर बोली। आवाज़ में ठहराव था।
तो फिर एग्रीमेंट में तुम ने अपनी सहमति क्यों दी?
उसका अंदाज़ बहुत जानलेवा था।
जिसे सुनकर सचमुच मायरा की जान निकल गई।
कोई बहस करने के बजाए वह बाहर निकल गई। क्योंकि बहस करने का मतलब था अपनी हार... और वह हारना नहीं चाहती थी। फिर चाहे उसे जो भी करना पड़े।
ताबिश भी उसके पीछे निकला।
किचन में जाते ही वह भगोना लेकर उसको गैस पर रखती है।
यह क्या कर रही हो?
ताबिश भी उसके पीछे-पीछे किचन में आ गया। उसके गैस जलाते ही वह हैरान हुआ।
कॉफी पीना है ना? उसे गुस्सा तो बहुत तेज़ आया। लेकिन वह शांति से बोली।
हां, लेकिन फिल्टर कॉफी...वह कॉफी मशीन की तरफ इशारा करता है।
मुझे बनाने नहीं आता उसमें।
कोई बात नहीं हम बता देते हैं।
कुछ काम है? तभी एक किचन हेल्पर घबराई हुई सी आती है। और धीमी आवाज़ में पूछती है।
ताबिश उंगली से बाहर की ओर इशारा करता है।
ताबिश का इशारा समझकर वह चुपचाप बाहर निकल चली गई।
उसी से कहते बना देती।
मैं जा रही हूं। कहते ही वह दो कदम बढ़ी।
जब आपको बनाने आता है तो खुद ही बना लेते। मुझे क्यों परेशान किया।
बनाने को तो कोई भी बना दें।
मेरी एक आवज़ पर कॉफी बनाने वालों की यहां पर लाइन लग जायेगी। वह उसकी तरफ झुककर हाथ को एक तरफ से दूसरे तरफ ले जाता है।
लेकिन आज तुम्हारे हाथ की कॉफी पीने का मूड हो रहा है।
उसकी मद्धिम सी मुस्कान अशमारा की जान जला गई।
उस पर से नज़र हटा कर वह कॉफी और चीनी उठाती है। फ्रीज से दूध निकाल कर सारा सामान कॉफी मेकर के पास रखती है।
उसके इस तरह काम करने पर ताबिश को खुशी तो बहुत हुई। लेकिन उसे और परेशानी करने के बजाए वह चुपचाप कॉफी बनाने लगता है।
मायरा उसकी हर हरकत को बहुत ध्यान से देख रही थी।
कॉफी मग में निकाल कर वह एक मग उसकी तरफ बढ़ाता है। और दूसरा अपने हाथ में लेता है।
मुझे नहीं पीना। वह अपना हाथ पीछे करती है।
मैंने पूछा? उसकी नज़रें उस पर ही ठहरी हुई थीं।
वह चुपचाप हाथ आगे करके मग थाम लेती है। उसकी नज़रों से उसे पहली बार उलझन हुई।
मग को काउंटर पर रख कर वह सारा सामान अपनी जगह पर रखती है। दूध को फ्रीज में रखकर वह अपना मग लेकर दरवाज़े की तरफ पढ़ती है।
ताबिश एक तरफ दरवाज़े की टेक लगाए कॉफी की चुस्कियां ले रहा था। लेकिन नज़र उसी पर ठहरी हुई थी।
वह दूसरी तरफ से बाहर निकल कर अपने कमरे की ओर बढ़ती है।
एक तो यहां एक जगह से दूसरी जगह जाने में ही इतना टाइम लग जाता है। वरना अपने घर में... एक कदम पर किचन, दूसरे कदम पर कमरा। सोचते हुए वह अपने कमरे के पास पहुंच ही जाती है।
ताबिश की आहट उसने महसूस कर ली थी। उसका कमरा भी उसी के बगल वाला था। इस लिए उसे उसके अपने पीछे आने से कोई मतलब नहीं था।
अगर अकेले ही कॉफी पीना होता तो तुम से क्यों कहता... जैसे ही वह अपने कमरे का दरवाज़ा खोल कर अंदर की तरफ कदम बढ़ाती है। ताबिश की आवाज़ उसके उठते कदमों को रोक देती है।
वह पलट कर हैरानी से उसे देखती है।
वह आंख से वहीं पर रखे सोफे की ओर इशारा करता है।
वह खामोशी से उसका हुक्म मानते हुए बैठ जाती है।
क्या बात है... खामोश है। लड़ नहीं रही। ताबिश को हैरत होती है। लेकिन वह भी खामोशी से बैठ जाता है।
कॉफी पीते ही वह उठ खड़ी होती है। तभी एक हेल्पर आकर उसका मग उठा लेती है।
इसे कैसा पता लगा कि मेरी कॉफी खत्म हो गई। वह हैरान हुई।
सोचो मत... नहीं समझ पाएंगी।
वह टेबल पर मग रखता है और कहते हुए अपने कमरे की ओर बढ़ जाता है।
इसे कैसे पता कि मैं क्या सोच रही थी?... वह अपनी ही उलझन में उलझी हुई थी तभी वही हेल्पर दोबारा आती है और मग लेकर चली जाती है।
वह भी चुपचाप अपने कमरे में चली जाती है।
कमाल है यहां के नौकर इतने एक्टिव हैं तो मालिक कितने एक्टिव होंगे।
...
क्या हुआ दानिश का कुछ पता चला कि वह कब तक इंडिया वापस आयेंगा?
सत्तार खां अपने आदमियों से पूछता है।
नहीं मालिक कुछ पता नहीं चल रहा। उनमें से एक धीरे से कहता है।
वैसे कहां है वह इस वक्त?
अभी वह भी पता नहीं लग रहा।
क्या मतलब... तुम लोगों को यह भी नहीं पता कि वह कहां है? सत्तार खां गुस्से से अपनी कुर्सी पर हाथ मार कर कहता है।
तुम लोग किसी काम के नहीं हो। जाओ यहां से, और पता करो कि दानिश सरफराज़ कहां है।
सत्तार खां सबके ओर देखते हुए गुस्से से कहता है। और तुरंत बाहर निकल जाते हैं।
...
फजर की नमाज़ पढ़कर मायरा कुछ देर कुरआन पढ़ती है। फिर बाहर लॉन में टहलने चली जाती है।
सुबह की पहली किरणें धीरे-धीरे आसमान के कोने से झांक रही थीं।
रात की स्याही अब फीकी पढ़ने लगी थी। लॉन की घास पर ओस की नन्हीं बूंदें मोतियों की तरह चमक रहीं थीं। हवा में ठंडक थी, मगर वह चुभती नहीं, बस हल्के से गालों को छूकर गुज़र रही थीं।
पेड़ों की पत्तियां मंद हवा के साथ सरसराहट की धीमी धुन छेड़ रही थीं। कहीं दूर से कोयल की मीठी आवाज़ सुनाई दे रही थी।
सुबह-सुबह इतने खूबसूरत माहौल में टहलते हुए उसे बहुत सुकून मिला। वह चप्पल उतार कर ठंडी घास पर चलने लगी। इस वक्त वह हर सोच से दूर थी। वह नहीं चाहती थी कि इस वक्त कोई परेशानी अपने दिमाग में लाए।
तभी उसका फोन बजता है। कुर्ता की पाकेट से फोन निकाल कर देखती है। मारिया का फोन था।
क्या कर रही थी? मुझे पता है तुम इस वक्त जाग जाती हो। इस लिए फोन किया। फोन उठते ही मारिया की आवाज़ आती है।
ब्लैक हाउस के गार्डन में टहल रही थी।
क्या? मारिया चींखी।
हां, कुदरत ने मुझे ब्लैक हाउस पहुंचा दिया।
अशमारा के लहजे में खुशी थी। जिसे मारिया ने भी महसूस किया।
लेकिन तुम वहां तक पहुंची कैसे? मारिया को यकीन ही नहीं हो रहा था।
वह सब छोड़ो, पहुंच गई इस बात पर खुश हो जाओ।
खुशी उसके हर अल्फ़ाज़ से छलक रही थी।
अब तो बस मौका मिलते ही मिस्टर बॉस पर हमला करना है। बहुत हीरो बने फिरते हैं ना... अशमारा की आंखों में दानिश का रवैया आ गया।
तुम बॉस से कब मिली? वह तो इंडिया अभी आए ही नहीं हैं। मारिया हैरानी से पूछती है।
तो फिर यहां जो है वह कौन हैं? अशमारा परेशान हुई।
वह ताबिश सर होंगे, दानिश सर के भाई।
ओह! और मैं समझी यही मिस्टर बॉस हैं।
तूने कुछ गलत तो नहीं किया उनके साथ? मारिया को फिक्र हुई।
नहीं, लेकिन मैं अपना मकसद पूरा किए बिना यहां से नहीं जाऊंगी। वह सख्ती से कहती है। और फोन रख देती है।
मिस्टर बॉस घूम लें जितना दुनिया घूमना है। लौटकर तो घर ही आयेंगे। तब तक मैं यहीं हूं। मन ही मन सोचते हुए वह वापस अंदर जाने के लिए मुड़ती है।
लेकिन मुड़ते ही उसकी सांस जहां थी वहीं रूक गई। उसके ठीक पीछे ताबिश खड़ा था।
जारी है...
रूबरू भाग 14
Comments
Post a Comment